Check Ingredients Before You Buy (Hindi)

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भारत में खाद्य लेबल पढ़ना क्यों अत्यंत आवश्यक है: बड़ी सेल्स के पीछे छिपा हुआ सच

परिचय

भारत आज दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते उपभोक्ता बाज़ारों में से एक है। हर साल बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (Multinational Companies – MNCs) नए खाद्य और उपभोक्ता उत्पाद भारतीय बाज़ार में लॉन्च करती हैं। भारी विज्ञापन, आकर्षक पैकेजिंग और बड़ी छूट वाली सेल्स के ज़रिए इन उत्पादों को बेचा जाता है।

पैकेट के सामने वाले हिस्से को देखने पर उत्पाद स्वस्थ, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला दिखाई देता है। लेकिन असली सवाल यह है:

हम वास्तव में क्या खा रहे हैं?

इस लेख का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है:

हर उपभोक्ता को कोई भी खाद्य उत्पाद खरीदने से पहले उसमें मौजूद सामग्री (Ingredients) और सर्विंग मात्रा (Serving Size) को अनिवार्य रूप से पढ़ना चाहिए।


बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारतीय उपभोक्ताओं को कैसे गुमराह करती हैं

कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग गुणवत्ता मानकों का पालन करती हैं। यूरोप या अमेरिका में बिकने वाला वही ब्रांड जब भारत में बेचा जाता है, तो अक्सर:

  • कम गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उपयोग किया जाता है
  • अधिक मात्रा में कृत्रिम रंग, फ्लेवर और प्रिज़रवेटिव मिलाए जाते हैं
  • पोषण मूल्य कम होने के बावजूद वही ब्रांड इमेज दिखाई जाती है

पैकेट के सामने बड़े अक्षरों में लिखा होता है:

  • विटामिन से भरपूर
  • हाई प्रोटीन
  • हेल्दी चॉइस
  • नेचुरल या फोर्टिफाइड

लेकिन असली जानकारी पैकेट के पीछे छिपी होती है।


पैकेट के पीछे का लेबल: वह जानकारी जिसे कंपनियाँ आप नहीं देखना चाहतीं

अधिकांश उपभोक्ता पैकेट के पीछे लिखी जानकारी नहीं पढ़ते। कंपनियाँ इसी आदत का फ़ायदा उठाती हैं।

भारत में खाद्य लेबल्स पर आमतौर पर पाई जाने वाली समस्याएँ:

  • बहुत छोटे अक्षरों में छपी सामग्री सूची
  • पैकेट की सिलवटों या सील किए गए हिस्सों में छिपी जानकारी
  • सामान्य उपभोक्ता के लिए कठिन रासायनिक नाम
  • सर्विंग साइज़ को कम दिखाकर चीनी, नमक और वसा को कम बताया जाना

उदाहरण के लिए:

  • चीनी को ग्लूकोज़ सिरप, माल्टोडेक्सट्रिन, डेक्सट्रोज़ जैसे नामों से दिखाया जाता है
  • सोडियम को अलग-अलग यौगिक नामों के पीछे छिपाया जाता है

कानूनी रूप से जानकारी छपी होती है, लेकिन व्यवहार में उसे पढ़ना मुश्किल होता है।


अधिक एडिटिव्स और उनका स्वास्थ्य पर प्रभाव

भारत में बिकने वाले कई पैकेज्ड फूड उत्पादों में अत्यधिक मात्रा में निम्न एडिटिव्स होते हैं:

  • कृत्रिम रंग
  • फ्लेवर एन्हांसर (जैसे MSG)
  • प्रिज़रवेटिव
  • कृत्रिम मिठास
  • हाइड्रोजेनेटेड वसा

लंबे समय तक इनके सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम:

  • मोटापा
  • मधुमेह
  • उच्च रक्तचाप
  • फैटी लिवर
  • पाचन संबंधी समस्याएँ
  • हार्मोन असंतुलन
  • हृदय रोग का बढ़ा हुआ खतरा

भारत पहले से ही जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड इसका एक बड़ा कारण है।


असली हथियार है विज्ञापन

कंपनियाँ उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने पर कम और विज्ञापनों पर बहुत ज़्यादा पैसा खर्च करती हैं।

विज्ञापनों में ज़ोर दिया जाता है:

  • परिवार और बच्चों से जुड़ी भावनात्मक तस्वीरों पर
  • फिल्मी सितारों और सेलिब्रिटीज़ पर
  • डॉक्टर द्वारा सुझाया गया, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध जैसे दावों पर

लेकिन विज्ञापन कभी नहीं बताते:

  • कौन-कौन से एडिटिव्स उपयोग किए गए हैं
  • वास्तव में कितनी चीनी और नमक मौजूद है
  • एक सर्विंग का वास्तविक अर्थ क्या है

इससे उपभोक्ता की धारणा और वास्तविकता के बीच खतरनाक अंतर पैदा होता है।


सच्चाई उजागर करने वाला केरल का एक यूट्यूबर

केरल का एक स्वतंत्र यूट्यूबर उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए सराहनीय काम कर रहा है।

उनकी खास बातें:

  • वे झूठी जानकारी नहीं फैलाते
  • वास्तविक उत्पाद लेबल को सबूत के रूप में दिखाते हैं
  • सामग्री सूची को सरल भाषा में समझाते हैं
  • पैकेट के पीछे लिखी जानकारी पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं

उनका संदेश साफ़ है:

पैकेट के सामने लिखे बड़े अक्षरों पर भरोसा मत कीजिए। पीछे छिपी सच्चाई पढ़िए।

इस विषय को बेहतर समझने के लिए उनके वीडियो देखने की सलाह दी जाती है।

यूट्यूब चैनल लिंक: यहाँ चैनल लिंक जोड़ें


यह डर फैलाने के लिए नहीं, जागरूकता के लिए है

यह लेख डर पैदा करने या किसी उत्पाद के बहिष्कार के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य है सोच-समझकर निर्णय लेना।

उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है:

  • वे क्या खा रहे हैं
  • कितनी मात्रा में खाना चाहिए
  • क्या यह बच्चों, बुज़ुर्गों या रोगियों के लिए उपयुक्त है

सामग्री सूची और सर्विंग साइज़ पढ़ना उतना ही ज़रूरी होना चाहिए जितना एक्सपायरी डेट देखना।


हर भारतीय उपभोक्ता को क्या करना चाहिए

किसी भी पैकेज्ड फूड को खरीदने से पहले:

  • पैकेट पलटकर सामग्री सूची पढ़ें
  • सर्विंग साइज़ और वास्तविक सेवन की तुलना करें
  • चीनी, नमक और वसा की मात्रा जाँचें
  • लंबे रासायनिक नामों वाले उत्पादों से बचें
  • जहाँ संभव हो, कम प्रोसेस्ड और पारंपरिक भोजन चुनें

याद रखें:

अगर किसी उत्पाद को बेचने के लिए बहुत ज़्यादा विज्ञापन चाहिए, तो शायद उसमें कुछ छिपा हुआ है।


निष्कर्ष

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कोई परोपकारी संस्थाएँ नहीं हैं – उनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना है। जब नियम कमज़ोर होते हैं और उपभोक्ता जागरूक नहीं होते, तो गुणवत्ता गिरती है।

इस व्यवस्था को बदलने की ताकत जागरूक उपभोक्ताओं के हाथ में है।

पैकेट के पीछे पढ़िए। सामग्री को समझिए। दावों पर सवाल उठाइए।

आपका स्वास्थ्य किसी भी छूट वाली सेल से कहीं अधिक कीमती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल उपभोक्ता जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी विशेष ब्रांड या कंपनी को लक्ष्य नहीं बनाया गया है।

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How to Read Ingredients list from packets ?

Just take picture from your phone open chatgpt app add this picture then ask , check details about this information , chatgpt explain you what is this

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